Punjab power crisis के बीच 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना से घरेलू लोड 40% बढ़ने का दावा है। मांग 17,452 MW पहुंची, नई क्षमता की जरूरत बढ़ी।
पंजाब में मुफ्त बिजली योजना के बीच बिजली की बढ़ती मांग राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन की ओर से पंजाब सरकार को भेजी गई एक communication के अनुसार, 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बाद राज्य में घरेलू बिजली लोड 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है। Punjab power crisis के बीच बिजली की मांग और उपलब्ध उत्पादन क्षमता के बीच बढ़ता अंतर चिंता का विषय बना हुआ है।
पावर इंजीनियर्स के अनुसार, पंजाब ने पिछले करीब एक दशक में अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं की है। दूसरी ओर, राज्य की अधिकतम बिजली मांग लगातार बढ़ी है। इस वजह से खासकर धान के सीजन में बिजली की उपलब्धता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।
धान के सीजन में 17,452 MW तक पहुंची मांग
एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग इस साल 17,400 MW के पार चली गई। PSPCL के आंकड़ों के मुताबिक इस साल peak demand 17,452 MW दर्ज की गई। धान के सीजन में राज्य को करीब 800 MW से 1,000 MW तक बिजली की कमी का सामना करना पड़ा।
पावर इंजीनियर्स का कहना है कि बढ़ती मांग के मुकाबले भरोसेमंद उत्पादन क्षमता में पर्याप्त इजाफा नहीं हुआ है। ऐसे में पंजाब को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बाहरी स्रोतों और बिजली बाजार से खरीद पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
दो साल में 19,466 MW तक पहुंच सकती है मांग
Central Electricity Authority यानी CEA के आकलन के अनुसार, पंजाब की बिजली मांग अगले दो वर्षों में 19,466 MW तक पहुंच सकती है। CEA ने यह भी संकेत दिया है कि power banking arrangements को शामिल करने के बावजूद राज्य की contracted capacity भविष्य की अनुमानित जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।
बिजली इंजीनियर्स के अनुसार, पंजाब के सामने एक और चुनौती Northern Grid से अतिरिक्त बिजली हासिल करने की है। राज्य जितनी अतिरिक्त बिजली खींच सकता है, उस पर Northern Regional Load Despatch Centre (NRLDC) की ओर से भी सीमाएं तय होती हैं। यह सीमा राज्य के अंदर transmission system की क्षमता और उसकी पर्याप्तता पर निर्भर करती है।
Punjab power crisis : पुरानी उत्पादन क्षमता बंद, नई क्षमता का इंतजार
पंजाब की मौजूदा स्थिति को लेकर इंजीनियर्स ने राज्य की generation capacity में लंबे समय से चले आ रहे ठहराव को भी जिम्मेदार बताया है। पिछले एक दशक में Bathinda स्थित Guru Nanak Dev Thermal Plant की units और Ropar Thermal Plant की दो units बंद की गईं। इनकी जगह समान क्षमता वाली नई उत्पादन इकाइयां अब तक नहीं जोड़ी गई हैं।
2016 में पंजाब की peak power demand करीब 11,000 MW थी, जो अब बढ़कर 17,452 MW हो गई है। यानी करीब एक दशक में मांग में 6,000 MW से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
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इस बढ़ती मांग का असर बिजली खरीद पर भी पड़ा है। पावर इंजीनियर्स के अनुसार, दिन के समय solar power उपलब्ध रहने के बावजूद शाम को सूरज ढलने के बाद इसकी उपलब्धता घट जाती है। इसी समय मांग बनी रहने के कारण बिजली खरीद महंगी हो सकती है।
Ropar में 800 MW की दो इकाइयों का प्रस्ताव
बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए Ropar Thermal Power Plant में 800 MW की दो नई units लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा पंजाब में किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर 800 MW की एक और unit लगाने तथा Bathinda के बंद thermal plant की जगह पर 250 MW का solar power project लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
Ropar में दो 800 MW units लगाने के प्रस्ताव को PSPCL Board of Directors की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, इन्हें राज्य क्षेत्र में विकसित किया जाए या private sector के जरिए, इस पर फैसला नहीं होने के कारण आगे की प्रक्रिया में देरी की बात सामने आई है।
Ropar को इसलिए भी उपयुक्त स्थान माना जा रहा है क्योंकि वहां जमीन और पहले से मौजूद infrastructure उपलब्ध है। PSPCL के पास Pachhwara coal mine से कोयले की उपलब्धता भी है, जिससे प्रस्तावित units के लिए fuel supply में मदद मिल सकती है।
Punjab power crisis के बीच पावर इंजीनियर्स का कहना है कि नई उत्पादन क्षमता जोड़ने में लगातार देरी होने पर आने वाले समय में राज्य की बिजली खरीद पर निर्भरता और बढ़ सकती है। खासकर अधिक मांग वाले समय में बाजार से बिजली खरीदने की लागत बढ़ने से PSPCL पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।