Sanju Samson Press Conference: अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में शानदार पारी खेलने के बाद संजू सैमसन ने भारतीय टीम के खेलने के तरीके और खुद पर पड़ने वाले दबाव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलते समय असफलता के बाद आलोचना का सामना करना आसान नहीं होता, लेकिन अनुभव ने उन्हें बाहरी शोर से ज्यादा अपनी तैयारी और खेल पर ध्यान देना सिखाया है।
सैमसन ने मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में सिर्फ 22 गेंदों पर 57 रन बनाए। उनकी पारी की मदद से भारत ने अफगानिस्तान को हराकर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।
Sanju Samson Press Conference: सैमसन ने बताया कैसे संभालते हैं दबाव
संजू सैमसन ने कहा कि भारतीय क्रिकेटर के तौर पर लगातार उम्मीदों के बीच खेलना चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर जब कोई खिलाड़ी असफल होता है तो उसके प्रदर्शन को लेकर चर्चा और आलोचना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि ऐसे समय में वह अपने खेल पर ध्यान रखने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि ऊंचे स्ट्राइक रेट के साथ आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए जोखिम उठाना जरूरी है।
सैमसन ने कहा कि अगर वह हर शॉट खेलने से पहले इस बात के बारे में सोचेंगे कि आउट होने पर लोग क्या कहेंगे, तो वह उस तरह से बल्लेबाजी नहीं कर पाएंगे जिस तरह भारतीय टीम उनसे उम्मीद करती है।
‘हम पिछले दो-तीन साल से इसी अंदाज में खेल रहे हैं’
सैमसन ने भारतीय टीम के आक्रामक बल्लेबाजी के तरीके का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक टी20 क्रिकेट में हर गेंद पर बड़े शॉट लगाने की कोशिश में कभी सफलता मिलती है और कभी नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम पिछले दो-तीन साल से इसी तरह के इरादे के साथ खेल रही है और यह तरीका टीम के लिए सफल भी रहा है। इसलिए उनका ध्यान पावरप्ले में गेंद को देखकर ज्यादा से ज्यादा रन बनाने पर रहता है।
नतीजे की नहीं, प्रक्रिया की निरंतरता जरूरी
सैमसन के मुताबिक टी20 क्रिकेट में हर मैच में एक जैसा व्यक्तिगत परिणाम हासिल करना खिलाड़ी के नियंत्रण में नहीं होता।
उन्होंने कहा कि असली निरंतरता तैयारी, अभ्यास और मानसिकता में होनी चाहिए। बल्लेबाज से हर बार एक निश्चित स्कोर या स्ट्राइक रेट की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उनके अनुसार बेखौफ क्रिकेट का मतलब यही है कि खिलाड़ी अपनी तैयारी और सोच पर भरोसा रखे और परिणाम को लेकर जरूरत से ज्यादा न सोचे।
टॉप-3 में जगह की होड़ पर भी बोले सैमसन
भारतीय टीम के टॉप-3 में जगह के लिए मौजूद प्रतिस्पर्धा को लेकर भी सैमसन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बाहर से भले ही खिलाड़ी एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नजर आते हों, लेकिन टीम के अंदर प्राथमिकता देश के लिए मैच जीतना है।
उन्होंने कहा कि टीम में जो भी खिलाड़ी खेल रहा हो, बाकी खिलाड़ियों को उसके अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद करनी चाहिए। अपने मौके का इंतजार करते हुए नकारात्मक सोच रखना टीम के लिए सही नहीं है।
सैमसन ने यह भी कहा कि चयन से जुड़े कठिन फैसलों में टीम का नेतृत्व समूह टीम को पहले रखने की कोशिश करता है। उन्होंने अपनी पिछली टीम से बाहर रहने की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह समझते हैं कि टीम मैनेजमेंट ने उस समय दूसरे फॉर्म में चल रहे युवा खिलाड़ी को मौका क्यों दिया।
सोशल मीडिया की आलोचना का असर होता है
सैमसन ने बाहरी आलोचना से खुद को पूरी तरह अलग रखने की बात भी नहीं कही। उन्होंने स्वीकार किया कि टिप्पणियां और आलोचना कभी-कभी प्रभावित करती हैं।
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उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह अपना ‘Wi-Fi बंद’ रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार सोशल मीडिया की टिप्पणियां या किसी वरिष्ठ खिलाड़ी की बात उनके सामने आ ही जाती है।
सैमसन ने माना कि शुरुआत में ऐसी बातें खराब लगती हैं। हालांकि, इसके बाद वह खुद को याद दिलाते हैं कि उन्हें कौन हैं और मैदान पर उन्हें क्या करना है।
टीम को पहले रखकर खेलना है
संजू सैमसन ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में बाहरी दबाव से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन खिलाड़ी की मानसिकता और तैयारी स्पष्ट होनी चाहिए।
उनके मुताबिक अगर बल्लेबाज हर शॉट से पहले आउट होने और उसके बाद होने वाली आलोचना के बारे में सोचने लगे, तो उसके खेल पर असर पड़ेगा। इसलिए उनका फोकस खुद को अभिव्यक्त करने और टीम को प्राथमिकता देने पर है।
अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में 57 रन की पारी के बाद सैमसन ने साफ किया कि वह दबाव को अपने खेल के रास्ते में नहीं आने देना चाहते और भारतीय टीम के आक्रामक अंदाज के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।