UPI पेमेंट को लेकर भारतपे के पूर्व एमडी अशनीर ग्रोवर ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए पूछा कि अगर किसी दोस्त को 1 लाख रुपये UPI से भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगता, तो दुकानदार को 2,500 रुपये का भुगतान करने पर चार्ज क्यों लगेगा।
ग्रोवर ने इस व्यवस्था के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इसमें सरकार का कौन सा खर्च शामिल है, जिसकी भरपाई दुकानदारों से की जानी चाहिए।
अशनीर ग्रोवर ने UPI चार्ज पर उठाया सवाल
अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि व्यक्ति से व्यक्ति को UPI के जरिए 1 लाख रुपये भेजने पर कोई पैसा नहीं लगता, लेकिन दुकानदार को 2,500 रुपये का भुगतान करने पर शुल्क लगाने की बात क्यों हो रही है।
उन्होंने इस अंतर को लेकर सवाल किया कि UPI लेनदेन में ऐसा कौन सा अतिरिक्त खर्च है, जो केवल दुकानदारों से वसूला जाना चाहिए।
ग्रोवर ने कहा कि इस पूरे मामले का लॉजिक उन्हें समझ नहीं आता और उन्होंने लोगों से इस बारे में जवाब मांगा।
RBI और बैंकों के आंकड़ों का दिया हवाला
अपने बयान में अशनीर ग्रोवर ने RBI, बैंकों और NPCI से जुड़े आंकड़ों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि RBI ने 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस सरकार को सौंपा है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2026 में सभी बैंकों का कुल मुनाफा 4 लाख करोड़ रुपये है।
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ग्रोवर ने NPCI के प्री-टैक्स प्रॉफिट का आंकड़ा 1,900 करोड़ रुपये बताते हुए सवाल उठाया कि जब उनके मुताबिक इस व्यवस्था में किसी को नुकसान नहीं हो रहा है, तो फिर दुकानदारों से शुल्क लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
दुकानदारों से वसूली पर जताई नाराजगी
अशनीर ग्रोवर ने दुकानदारों से संभावित शुल्क वसूली के तर्क पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे लेकर कहा कि जब सिस्टम से जुड़े प्रमुख संस्थान और बैंक मुनाफे में हैं, तो दुकानदारों पर अतिरिक्त शुल्क डालने का आधार क्या है।
उन्होंने इस कदम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे अब तक की बड़ी सरकारी मूर्खताओं में से एक बताया।