Jantar Mantar प्रदर्शन को लेकर छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगेगा।

जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दे चुका है, तो फिर छात्र को इस तरह का नोटिस कैसे जारी किया गया। पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।

छात्र को क्यों जारी किया गया था नोटिस?

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, छात्र पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप था।

नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये के निजी मुचलके की मांग की गई थी। यह नोटिस 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मामला तीन जजों की पीठ के सामने एक वकील ने उठाया। वकील ने दावा किया कि छात्रों के साथ इस तरह का “प्रयोग” किया जा रहा है और नोटिस सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देश के विपरीत था।

इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि युवाओं के खिलाफ कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि कोर्ट इस संबंध में पहले ही स्पष्ट आदेश दे चुका है।

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CJI ने यह भी सवाल किया कि जब अदालत पहले ही छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दे चुकी है, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया।

मजिस्ट्रेट से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस मामले में कार्यकारी मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगी और उनसे पूछा जाएगा कि नोटिस किस आधार पर जारी किया गया। इससे साफ है कि कोर्ट छात्र को जारी किए गए नोटिस और अपने पहले के आदेश के बीच संभावित विरोधाभास को गंभीरता से देख रहा है।

छात्र ने आरोपों से किया इनकार

नोटिस पाने वाले छात्र अक्षत त्रिपाठी ने प्रदर्शन में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था। छात्र ने यह भी दावा किया कि जिस समय प्रदर्शन हुआ, उस दौरान वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहा था।

क्या है पूरे मामले की अहम बात?

  • छात्र का नाम अक्षत त्रिपाठी है।
  • वह गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का छात्र है।
  • उसे ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस मिला था।
  • नोटिस में 5 लाख रुपये के निजी मुचलके की मांग की गई थी।
  • नोटिस 4 सितंबर को BNSS की धारा 130 के तहत जारी हुआ।
  • अधिकारियों के मुताबिक, बाद में नोटिस का आदेश वापस ले लिया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट अब कार्यकारी मजिस्ट्रेट से इस मामले में स्पष्टीकरण मांग सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सबकी नजर

छात्र को जारी नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत ने संबंधित तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा है और कार्यकारी मजिस्ट्रेट से जवाब मांगे जाने की बात कही है।

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