देवरिया मामले में CCTV रिकॉर्डिंग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से कड़े सवाल किए हैं। कोर्ट ने थाने के CCTV कैमरों के काम करने और उनकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर SHO और SP से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान अधिकारियों के जवाबों से अदालत की नाराजगी भी सामने आई।
मामला याचिकाकर्ता को कथित तौर पर 10 दिन तक अवैध हिरासत में रखे जाने के आरोप से जुड़ा है। इस मामले में थाने की CCTV फुटेज अहम साक्ष्य हो सकती थी, लेकिन रिकॉर्डिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
CCTV रिकॉर्डिंग को लेकर SHO से सवाल
जस्टिस जे. अतुल श्रीधरन ने सुनवाई के दौरान SHO से पूछा कि अगर 14 अप्रैल से कैमरा काम कर रहा था, तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जब SHO करीब दो महीने तक थाने के प्रभारी रहे, तब CCTV की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई गई। SHO अदालत के इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
SP ने मांगी माफी, कोर्ट ने कहा- जनता से माफी मांगिए
सुनवाई के दौरान SP ने अदालत से माफी मांगी। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोर्ट से माफी मांगने के बजाय जनता से माफी मांगनी चाहिए। कोर्ट की यह टिप्पणी पुलिस की जवाबदेही को लेकर सुनवाई में सामने आई गंभीर नाराजगी को दिखाती है।
SHO को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?
अदालत ने पुलिस अधिकारियों से यह भी पूछा कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद SHO को निलंबित क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इस मामले में दोनों अधिकारियों से यह सवाल भी किया कि क्या उन पर प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये का मुआवजा लगाया जाना चाहिए।
13 अप्रैल की कुछ रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की जानकारी
SP की ओर से अदालत को बताया गया कि 13 अप्रैल की CCTV रिकॉर्डिंग के कुछ हिस्से उपलब्ध थे। यह भी बताया गया कि CCTV सिस्टम को रीसेट करना पड़ा था।
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इस पर कोर्ट ने तकनीकी खराबी के दावे पर भी सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि अगर वास्तव में तकनीकी समस्या थी तो CCTV कंपनी के विशेषज्ञ को बुलाकर सिस्टम की जांच क्यों नहीं कराई गई।
पुलिस अकादमी की शपथ पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने SHO से पुलिस अकादमी में ली गई शपथ को लेकर भी सवाल किया। हालांकि, SHO इस सवाल का जवाब नहीं दे सके। पूरे मामले में CCTV रिकॉर्डिंग की उपलब्धता, पुलिस की लापरवाही और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर अदालत की सख्ती साफ दिखाई दी। अब इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित लापरवाही पर उठे सवाल अहम बने हुए हैं।