₹2 करोड़ की ‘हनुमान अंश’ को टैक्स-फ्री करने में क्यों हुई देरी? जानिए इसके पीछे का असली सच

भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 2026 को एक बड़े उलटफेर के लिए याद किया जाएगा। बिना किसी बड़े सुपरस्टार, बिना किसी भारी-भरकम बजट और बिना किसी ग्लैमर के, मात्र 2 करोड़ रुपये में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर जो करिश्मा किया है, उसकी कल्पना शायद फिल्म के मेकर्स ने भी नहीं की थी। प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा के शुरुआती जीवन पर आधारित यह फिल्म आज हर सनातनी और सिनेमा प्रेमी की पहली पसंद बनी हुई है।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात

लेकिन फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता के बीच दर्शकों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा था: जहाँ एक तरफ बड़े सितारों की और अक्सर विवादों में रहने वाली फिल्मों को सरकारें तुरंत टैक्स-फ्री कर देती हैं, वहीं ‘हनुमान अंश’ जैसी सात्विक और आध्यात्मिक फिल्म को शुरुआत में यह सहूलियत क्यों नहीं मिली? क्या जनता ने इसकी माँग नहीं की? आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा सच और फिल्म के चौंकाने वाले आंकड़े।

शुरुआत ₹10 लाख से और अब ₹160 करोड़ पार: एक बॉक्स ऑफिस मिरेकल

आमतौर पर बड़ी फिल्में पहले दिन ही करोड़ों का बिजनेस करती हैं, लेकिन ‘हनुमान अंश’ के आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि आस्था और अच्छी कहानी में कितनी ताकत होती है। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले दिन महज ₹10 लाख की बेहद धीमी ओपनिंग की थी। शुरुआती दो हफ्तों में फिल्म का कलेक्शन सिर्फ ₹1.48 करोड़ के आसपास था। [1, 2]

असली जादू तीसरे और चौथे हफ्ते में शुरू हुआ, जब दर्शकों की तारीफ (वर्ड ऑफ माउथ) और सोशल मीडिया रील्स के जरिए फिल्म की चर्चा पूरे देश में फैल गई। फिल्म ने रिलीज के 31वें दिन ₹22.75 करोड़ का नेट कलेक्शन करके अपना सबसे बड़ा सिंगल-डे रिकॉर्ड बनाया, जो इसके कुल बजट से 11 गुना से भी ज्यादा है। मौजूदा समय में (रिलीज के 33वें दिन तक), यह फिल्म भारत में ₹143 करोड़ से अधिक का नेट और लगभग ₹169 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। ₹2 करोड़ के बजट पर यह फिल्म अपने निवेशकों को 2,000% से अधिक का मुनाफा कमा कर दे चुकी है, जिसने बड़े बजट की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है।

उत्तराखंड सरकार ने तोड़ी चुप्पी, किया टैक्स-फ्री

अगर आप भी यही सोच रहे हैं कि फिल्म को टैक्स-फ्री नहीं किया गया, तो आपको बता दें कि सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दिशा में बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री ने अपनी कैबिनेट के साथ विशेष रूप से इस फिल्म को देखा और देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक साख को देखते हुए इसे तुरंत राज्य में टैक्स-फ्री (SGST मुक्त) करने की घोषणा कर दी।

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महाराष्ट्र में भी टैक्स-फ्री करने की मांग

उत्तराखंड के इस फैसले के बाद अब ऑल इंडियन सिने Workers एसोसिएशन (AICWA) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर फिल्म को वहाँ भी टैक्स-फ्री करने की आधिकारिक माँग की है। सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसी सरकारों से भी ऐसी ही उम्मीदें की जा रही हैं, और हाल ही में फिल्म की टीम ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की है।

शुरुआत में क्यों नहीं उठी बड़े पैमाने पर माँग?

कंगना रनौत या अन्य बड़े बॉलीवुड सितारों की फिल्मों को लेकर रिलीज के पहले दिन से ही एक अलग तरह का पीआर (PR) और राजनीतिक माहौल बनने लगता है। कई बार विवादित विषयों पर बनी फिल्मों के समर्थक तुरंत सोशल मीडिया पर ‘टैक्स-फ्री’ के ट्रेंड चलाने लगते हैं। इसके विपरीत, ‘हनुमान अंश’ के साथ ऐसा नहीं हुआ, जिसके कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • स्लीपर हिट का सफर: यह फिल्म किसी बड़े धमाके के साथ रिलीज नहीं हुई थी। पहले दो हफ्तों तक यह बहुत शांत रही। इसे दर्शकों के अटूट विश्वास ने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। जब तक राजनीतिक हलकों और आम जनता को फिल्म की गहराई का अंदाजा हुआ, तब तक यह पहले ही ब्लॉकबस्टर हो चुकी थी।
  • राजनीतिक प्रोपेगैंडा से दूरी: यह फिल्म किसी राजनीतिक एजेंडे या नफरत की बैसाखी पर नहीं टिकी है। यह बाबा के प्रेम, सेवा, भंडारे और अध्यात्म का उत्सव है। यही वजह है कि इसके दर्शकों ने सोशल मीडिया पर चिल्लाने के बजाय चुपचाप थिएटर्स में जाकर टिकट खरीदना और बाबा के विचारों को आत्मसात करना बेहतर समझा।
  • सादगीपूर्ण प्रमोशन: खुद फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम ने इसे एक फिल्म से ज़्यादा एक ‘सत्संग’ की तरह पेश किया। यहाँ तक कि खुद फिल्म इंडस्ट्री के बड़े निर्देशकों और सितारों ने भी इसकी सादगी की सराहना की है। [1]

टैक्स-फ्री का व्यावहारिक गणित

आज के GST युग में जब कोई राज्य किसी फिल्म को टैक्स-फ्री घोषित करता है, तो वह केवल अपने हिस्से का 6% से 9% तक का State GST (SGST) ही माफ़ कर पाता है। इससे टिकट की कीमतों में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं आता। ‘हनुमान अंश’ ने यह साबित कर दिया है कि अगर फिल्म की नीयत साफ हो और कहानी में दम हो, तो जनता टिकट की कीमत की परवाह किए बिना उसे अपने सिर-आँखों पर बिठाती है।

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला सराहनीय है और उम्मीद है कि बाबा नीम करौली के चमत्कारों और सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने वाली इस फिल्म को देश के अन्य राज्यों में भी जल्द ही टैक्स-फ्री कर दिया जाएगा ताकि समाज का हर वर्ग इसे आसानी से देख सके।

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