बद्रीनाथ धाम में Devbhoomi Cultural Festival पर विवाद, DM के नोटिस के बाद उठे अनुमति को लेकर सवाल

बद्रीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को हुए Devbhoomi Cultural Festival 2026 को लेकर विवाद अब और बढ़ गया है। कार्यक्रम के दौरान तेज संगीत और नृत्य के वीडियो सामने आने के बाद बद्रीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा और आयोजन की अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी कार्यक्रम के स्वरूप पर आपत्ति जताई है।

बद्रीनाथ धाम में Devbhoomi Cultural Festival पर विवाद

इसी बीच चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार की ओर से गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। नोटिस में कार्यक्रम के आयोजन और पूर्व अनुमति से जुड़े सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

19–20 सितंबर को हुआ था सांस्कृतिक महोत्सव

बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में 19 और 20 सितंबर को दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया गया था। आधिकारिक कार्यक्रम की जानकारी के मुताबिक इसकी थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थी और यह भारतीय सेना की पहल के तौर पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में लोक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल थीं।

महोत्सव के दूसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। उस दौरान जिलाधिकारी गौरव कुमार समेत प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।

विवाद उस समय बढ़ा जब कार्यक्रम के दौरान तेज संगीत, DJ और लोगों के नाचने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद धार्मिक स्थल की मर्यादा और कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर सवाल उठने लगे।

मुरली मनोहर जोशी ने भी जताई आपत्ति

कार्यक्रम को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने बद्रीनाथ धाम में इस तरह के शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रम की अनुमति दिए जाने को लेकर सवाल उठाया और इसे धाम की सांस्कृतिक मर्यादा तथा पवित्रता से जोड़कर चिंता व्यक्त की।

इसके बाद आयोजन की अनुमति और प्रशासनिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

अब DM ने आयोजन को लेकर मांगा जवाब

विवाद के बीच चमोली के DM गौरव कुमार की ओर से गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए पहले से अनुमति लिए जाने और आयोजन के औचित्य को लेकर जवाब मांगा है। नोटिस में भारी भीड़ और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम का भी उल्लेख बताया गया है।

यहीं से पूरे मामले में एक अहम सवाल उठ रहा है—जब कार्यक्रम बद्रीनाथ में हुआ और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उसमें शामिल हुए, तो आयोजन की अनुमति और प्रशासन की भूमिका आखिर क्या थी?

प्रशासन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आयोजन को लेकर शुरुआती जानकारी में भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान की बात सामने आई थी। कार्यक्रम से पहले जारी जानकारी में भी इसे सेना और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल बताया गया था।

हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार की ओर से यह कहा गया कि कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का चयन और उनका स्वरूप सेना की ओर से तय किया गया था तथा जिला प्रशासन की भूमिका सांस्कृतिक कार्यक्रमों के निर्धारण में नहीं थी।

यही विरोधाभास अब चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ आयोजन को लेकर प्रशासन और सेना की साझेदारी का उल्लेख मिलता है, वहीं विवाद के बाद प्रशासन की ओर से आयोजन की अनुमति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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फिलहाल नोटिस के जवाब और आयोजन से जुड़ी अनुमति की स्थिति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कार्यक्रम के लिए औपचारिक अनुमति किस स्तर पर ली गई थी और आयोजन की जिम्मेदारी किसकी थी। बद्रीनाथ धाम में हुए इस कार्यक्रम ने धार्मिक मर्यादा, प्रशासनिक जवाबदेही और आयोजन की प्रक्रिया—तीनों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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