जम्मू-कश्मीर: महिला अधिकारी से अभद्रता के आरोप में IAS Rajeev Ranjan के खिलाफ जांच, 15 दिन में रिपोर्ट

IAS Rajeev Ranjan inquiry के आदेश के बाद जम्मू-कश्मीर में महिला अधिकारी से कथित अभद्रता के मामले की जांच होगी। 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

महिला अधिकारी से अभद्रता के आरोप में IAS Rajeev Ranjan के खिलाफ जांच

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी पर ऑनलाइन सरकारी बैठक के दौरान महिला अधिकारी के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। मामले में IAS अधिकारी Rajeev Ranjan की कथित टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी नाराजगी जताई है। सरकार ने जांच अधिकारी को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

यह मामला जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) की अधिकारी बनीश वानी से जुड़ा है, जो गांदरबल में असिस्टेंट डायरेक्टर, एम्प्लॉयमेंट के पद पर तैनात हैं। आरोप है कि एक ऑनलाइन सरकारी बैठक के दौरान राजीव रंजन ने उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और अपने वरिष्ठ पद का हवाला देते हुए बात की।

IAS Rajeev Ranjan के खिलाफ जांच के आदेश

जम्मू-कश्मीर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी मंदीप कौर को नियुक्त किया है। वह सरकार में कमिश्नर/सेक्रेटरी के पद पर हैं और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग के कमिश्नर/सेक्रेटरी एम. राजू की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राजीव रंजन और बनीश वानी से जुड़े कथित दुर्व्यवहार के मामले की गहराई से जांच की जाएगी। यह मामला प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सामने आई खबरों के आधार पर भी जांच के दायरे में आया है।

जांच अधिकारी को आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। मामले में सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अमित वर्मानी को प्रस्तुतिकरण अधिकारी बनाया गया है।

जांच का उद्देश्य बैठक के दौरान कथित तौर पर हुई घटना और संबंधित अधिकारी के व्यवहार से जुड़े मामले की पड़ताल करना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।

ऑनलाइन बैठक में क्या हुआ था?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राजीव रंजन ने एक ऑनलाइन सरकारी बैठक में बनीश वानी के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। राजीव रंजन 2010 बैच के IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

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रिपोर्ट में बैठक के दौरान उनके द्वारा महिला अधिकारी को “bloody shit” कहने और यह जताने का उल्लेख है कि वह उनके वरिष्ठ अधिकारी हैं। इस कथित टिप्पणी के सामने आने के बाद घाटी में उनके व्यवहार को लेकर आलोचना हुई। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपों की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है।

उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वरिष्ठ IAS अधिकारी का व्यवहार उस स्तर के अनुरूप नहीं था, जिसकी एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से उम्मीद की जाती है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर बताया कि उन्होंने इस मामले को मुख्य सचिव के सामने कड़े शब्दों में उठाया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए ऑनलाइन सरकारी बैठक के वीडियो को उन्होंने देखा है। उमर अब्दुल्ला के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी के कथित व्यवहार के बाद कनिष्ठ JKAS अधिकारी को धमकी दिए जाने की बात ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

महिला अधिकारी के खिलाफ बदले की कार्रवाई न करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में IAS अधिकारियों पर नियंत्रण लोक भवन के पास है। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि बनीश वानी के खिलाफ किसी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न हो। इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने महिला अधिकारी को प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा देने और मामले के बाद उनके खिलाफ किसी प्रतिकूल कार्रवाई को रोकने की बात कही है।

अब जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर

सरकार के आदेश के बाद अब जांच अधिकारी मंदीप कौर को तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल राजीव रंजन के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जा रही है। 15 दिनों की समय सीमा में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश के चलते इस मामले में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।

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