Punjab Power Crisis: पंजाब में बिजली संकट ने आम लोगों, किसानों और कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य में कोयले की कमी के चलते बिजली उत्पादन प्रभावित होने की बात सामने आई है। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद के मुताबिक, देशव्यापी कोयला संकट का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है, जिसके कारण पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में 4 से 8 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है।
लंबे और अघोषित पावर कट के चलते गर्मी और उमस के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बिजली पर निर्भर उद्योगों और किसानों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
कोयले की कमी से थर्मल प्लांट प्रभावित
बिजली संकट का एक बड़ा कारण थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी बताई जा रही है। राजपुरा स्थित नाभा पावर और मानसा स्थित तलवंडी साबो जैसे बड़े निजी थर्मल प्लांटों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। कई यूनिट कम क्षमता पर चल रही हैं या बंद हैं।
इसका सीधा असर राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है। ग्रिड पर दबाव बढ़ने के बीच PSPCL को अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर बिजली कटौती करनी पड़ रही है।
लुधियाना-जालंधर के उद्योगों पर असर
बिजली कटौती का असर पंजाब के औद्योगिक इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। लुधियाना और जालंधर जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में बिजली की उपलब्धता प्रभावित होने से कारखानों के काम पर असर पड़ा है।
मशीनों पर निर्भर छोटे कारोबार और उद्योग बिजली कटौती के कारण प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर रोजाना काम करने वाले मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर भी पड़ रहा है।
किसानों के लिए भी बढ़ी परेशानी
ग्रामीण इलाकों में बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा खेती से जुड़ा है। किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलाने होते हैं, लेकिन लंबे बिजली कटों के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है।
ऐसे में बिजली की अनियमित आपूर्ति किसानों के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण बनी हुई है।
गर्मी में घरेलू उपभोक्ता परेशान
शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिना पूर्व सूचना बिजली जाने से घरों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
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गर्मी और उमस के बीच लंबे समय तक बिजली न रहने से बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्गों की परेशानी तक कई तरह की दिक्कतें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर इनवर्टर भी लंबे कट के सामने ज्यादा देर तक राहत नहीं दे पा रहे हैं।
बिजली संकट पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने इसे केवल पंजाब तक सीमित समस्या नहीं बताया है। उनके मुताबिक, देशभर में कोयले की कमी के कारण करीब 63 गीगावाट (GW) बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।
राज्य सरकार की ओर से संकट के लिए केंद्र से कोयले की कम आपूर्ति को जिम्मेदार बताया जा रहा है। वहीं, विपक्ष और केंद्रीय मंत्रालयों की ओर से बिजली व्यवस्था में कुप्रबंधन और सरकारी बिजली संयंत्रों की कम होती कार्यक्षमता को भी संकट की वजह बताया गया है।
इन दावों और आरोपों के बीच सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जो लगातार बिजली आपूर्ति की उम्मीद कर रहे हैं।
अब राहत के लिए क्या कदम उठाएगी सरकार?
पंजाब में बिजली संकट के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है। महंगे दामों पर बाहर से बिजली खरीदकर आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश होती है या संकट का समाधान कोयले की उपलब्धता बढ़ने के बाद ही होगा, इस पर सबकी नजर है।
फिलहाल कोयले की कमी और बिजली उत्पादन में आई गिरावट ने पंजाब में बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।