HDFC Bank के CEO और MD Sashidhar Jagdishan ने अपने दूसरे कार्यकाल के लिए आगे बढ़ने से इनकार कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला है। बैंक के बोर्ड ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन Jagdishan अपने फैसले पर कायम रहे।
करीब तीन दशक तक HDFC Bank से जुड़े रहे Jagdishan वर्ष 2020 में बैंक के CEO बने थे। उन्होंने Aditya Puri के बाद देश के सबसे बड़े निजी बैंक की कमान संभाली थी। उनके अचानक बाहर होने के फैसले ने निवेशकों और बैंक कर्मचारियों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
Sashidhar Jagdishan ने दूसरा कार्यकाल क्यों नहीं स्वीकार किया?
HDFC Bank ने आधिकारिक तौर पर Jagdishan के फैसले के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के नए चेयरमैन Rajiv Kumar की प्रस्तावित रणनीतिक बदलावों को लेकर Jagdishan के साथ मतभेद सामने आए थे।
Rajiv Kumar जून 2026 में HDFC Bank के चेयरमैन बने। बैंकिंग और सरकारी क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले Kumar बैंक की लोन ग्रोथ तेज करने, टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने और पुरानी कारोबारी चुनौतियों से निपटने पर जोर दे रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, Kumar बैंक की वरिष्ठ नेतृत्व टीम में भी कुछ बदलाव चाहते थे। Jagdishan इन प्रस्तावित बदलावों के सभी हिस्सों से सहमत नहीं थे।
नेतृत्व टीम में बदलाव को लेकर मतभेद
बताया गया है कि Jagdishan अपनी भरोसेमंद टीम के कई अधिकारियों को बनाए रखना चाहते थे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन की योजना बैंक के कामकाज और नेतृत्व संरचना में बदलाव लाने की थी। इसी मतभेद के बीच Jagdishan ने अपनी टीम में बड़े बदलाव स्वीकार करने के बजाय मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ने का रास्ता चुना। रिपोर्टों में इसे उनके अचानक बाहर होने के पीछे की प्रमुख वजहों में से एक बताया गया है।
RBI और बोर्ड के समर्थन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
Jagdishan के संभावित दूसरे कार्यकाल को लेकर HDFC Bank के भीतर और बाहर अलग-अलग राय होने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
Bloomberg के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की राय एक और कार्यकाल के पक्ष में थी, जबकि कुछ अन्य अधिकारियों की अलग चिंताएं थीं। Jagdishan कथित तौर पर अपने अगले कार्यकाल के लिए बैंक के बोर्ड और नियामक दोनों का स्पष्ट समर्थन चाहते थे। हालांकि, वह कथित तौर पर दोबारा कार्यकाल हासिल करने के लिए बोर्ड सदस्यों के बीच समर्थन जुटाने या किसी तरह की बातचीत करने के इच्छुक नहीं थे।
Jagdishan के कार्यकाल में बैंक के सामने आईं चुनौतियां
Sashidhar Jagdishan का कार्यकाल सिर्फ नेतृत्व से जुड़े बदलावों तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान HDFC Bank को नियामकीय और गवर्नेंस से जुड़ी कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
2023 में Housing Development Finance Corporation यानी HDFC Ltd. के साथ विलय के बाद बैंक के सामने कारोबार से जुड़ी नई चुनौतियां आईं। विलय के बाद बड़ी संख्या में लंबे समय वाले होम लोन बैंक की बैलेंस शीट का हिस्सा बने, जिससे लिक्विडिटी और मुनाफे के मार्जिन पर दबाव की स्थिति बनी।
निवेशकों के बीच यह सवाल भी रहा कि विलय के बाद HDFC Bank अपनी पुरानी तेज ग्रोथ को कितनी जल्दी हासिल कर पाएगा।
शेयर प्रदर्शन ने भी बढ़ाई चिंता
2026 में HDFC Bank के शेयरों का प्रदर्शन बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख बेंचमार्क की तुलना में कमजोर रहा। शेयर बाजार में इस प्रदर्शन ने बैंक की ग्रोथ और रणनीति को लेकर निवेशकों की चिंताओं को बढ़ाया।
ऐसे समय में नए चेयरमैन की ओर से बैंक के कामकाज में बदलाव की योजना और Jagdishan की नेतृत्व टीम को लेकर अलग राय ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
गवर्नेंस से जुड़े विवाद भी रहे चर्चा में
Jagdishan के संभावित दूसरे कार्यकाल के दौरान बैंक के गवर्नेंस से जुड़े कुछ मुद्दे भी चर्चा में रहे। डिजिटल प्लेटफॉर्म और विदेशी कारोबार से संबंधित नियामकीय चिंताओं का भी उल्लेख हुआ।
जुलाई में HDFC Bank के बोर्ड ने Jagdishan और दो अन्य अधिकारियों पर “business overreach” से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी। इससे पहले बैंक के पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty ने भी आंतरिक कामकाज से जुड़े मतभेदों के बाद इस्तीफा दिया था। HDFC Bank ने गवर्नेंस से जुड़े कई आरोपों को खारिज किया था, जबकि नियामकों की ओर से बैंक का बचाव भी किया गया था। इन घटनाओं के कारण Jagdishan के संभावित विस्तार को लेकर माहौल आसान नहीं रहा।
अब HDFC Bank के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
Jagdishan के जाने के बाद HDFC Bank को अब नए CEO की तलाश करनी होगी। नए प्रमुख की नियुक्ति के लिए नियामकीय मंजूरी भी जरूरी होगी।
बैंक के सामने यह फैसला अहम होगा कि वह किसी बाहरी उम्मीदवार को जिम्मेदारी देता है या फिर अपने मौजूदा नेतृत्व से किसी व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। बाहरी उम्मीदवार बैंक में बड़े बदलाव ला सकता है, जबकि अंदर से नियुक्ति होने पर मौजूदा व्यवस्था में निरंतरता बनी रह सकती है।
HDFC Bank में नेतृत्व परिवर्तन पर सबकी नजर
Sashidhar Jagdishan का जाना ऐसे समय में हो रहा है जब HDFC Bank विलय के बाद अपने कारोबार की दिशा और ग्रोथ को लेकर महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
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उनके उत्तराधिकारी का चुनाव यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि Rajiv Kumar की प्रस्तावित बदलावों की योजना किस तरह आगे बढ़ती है। साथ ही, यह बदलाव HDFC Bank की लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन की छवि के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
फिलहाल उत्तराधिकारी के नाम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में CEO पद के लिए आगे होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया निवेशकों के लिए आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक होगी।