नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी को लेकर दिल्ली के बीकानेर हाउस में विवाद सामने आया है। रायहान के मुताबिक, उनकी प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले प्रबंधन ने कई तस्वीरों को हटाने के लिए कहा। उन्होंने दावा किया कि तस्वीरों पर आपत्ति जताने के बावजूद उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह नहीं बताया गया कि किन तस्वीरों को किस नियम के तहत हटाया जाना चाहिए।
रायहान की प्रदर्शनी का नाम ‘No Idea is Fine’ था और इसका उद्घाटन शाम 7 बजे होना था। उनके अनुसार, प्रदर्शनी शुरू होने से करीब 24 घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने कुछ तस्वीरों को अपनी नीति के खिलाफ बताया। इसके बाद तस्वीरों को लेकर बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन मामला प्रदर्शनी के दिन तक नहीं सुलझ पाया।
प्रदर्शनी से पहले तस्वीरों पर जताई गई आपत्ति
रायहान वाड्रा ने घटना के बारे में बताते हुए कहा कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने सबसे पहले उन्हें कुछ तस्वीरों पर आपत्ति होने की जानकारी दी थी। उन्होंने प्रबंधन से संबंधित तस्वीरों की पहचान करने और उन पर चर्चा करने को कहा।
उनके मुताबिक, इसके बाद अगले दिन तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। फिर डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर ने उनसे संपर्क कर सभी तस्वीरें हटाने को कहा। रायहान के अनुसार, ये तस्वीरें पिछले एक साल के दौरान दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों की स्ट्रीट फोटोग्राफी का हिस्सा थीं।
रेहान वाड्रा ने सवाल उठाया कि प्रदर्शनी का लेआउट एक सप्ताह पहले साझा किए जाने के बावजूद आपत्तियां पहले क्यों नहीं बताई गईं। उनके मुताबिक, प्रबंधन ने कहा कि वे लेआउट देख नहीं पाए थे। रेहान वाड्रा का कहना था कि यदि लेआउट देखने में परेशानी थी, तो इसकी जानकारी पहले दी जा सकती थी, ताकि समय रहते बदलाव किए जा सकें।
सभी 70 तस्वीरें हटाने को कहा गया
रेहान वाड्रा के अनुसार, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रत्येक तस्वीर को हटाने का कारण लिखित रूप में देने का अनुरोध किया था। उनका दावा है कि उन्हें ऐसा कोई विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 3 बजे बीकानेर हाउस के प्रमुख अधिकारी, प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर, उनसे मिलने पहुंचे। इस बातचीत में भी तस्वीरों को लेकर आपत्ति जताई गई। रायहान के मुताबिक, अधिकारी ने प्रदर्शनी की नीति में राजनीतिक सामग्री पर रोक का हवाला दिया।
रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं से जुड़ी ज्यादातर तस्वीरें पहले ही हटा दी थीं। उन्होंने कुछ तस्वीरों पर आपत्ति होने की स्थिति में उन्हें बदलने की पेशकश भी की। हालांकि, उनके दावे के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि 70 में से कोई भी तस्वीर प्रदर्शित नहीं की जाएगी।
शाम 5 बजे तक तस्वीरें हटाने का नोटिस
रायहान ने बताया कि दोपहर 3:30 बजे उन्हें नोटिस दिया गया। उनके अनुसार, नोटिस में शाम 5 बजे तक तस्वीरें नहीं हटाने पर इमारत को सील करने और प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी गई थी।
इसके बाद उन्होंने प्रबंधन के निर्देशों का पालन करते हुए तस्वीरों के फ्रेम उलट दिए, ताकि उनके सामने की जगह पीछे का हिस्सा दिखाई दे। रायहान के मुताबिक, इस तरीके पर भी आपत्ति जताई गई। बाद में तस्वीरों को एक तरफ रखा गया, लेकिन इस व्यवस्था पर भी प्रबंधन ने असहमति जताई। इसके बाद तस्वीरों को स्टोरेज में रख दिया गया।
तिरंगे की तस्वीरों को लेकर भी हुआ विवाद
रेहान वाड्रा के बयान के मुताबिक, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की दो तस्वीरें प्रदर्शनी में रहने दी थीं। अधिकारियों ने उन्हें भी हटाने के लिए कहा।
रेहान वाड्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए लिखित निर्देश मांगे कि भारतीय तिरंगे की तस्वीर हटाने की जरूरत क्यों है। उनका कहना है कि इस संबंध में भी उन्हें लिखित आदेश नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वह कपड़े बदलने के लिए घर चले गए। उनके अनुसार, इस दौरान अधिकारियों ने खुद एक तस्वीर हटा दी, जबकि एक तस्वीर वहां बची हुई थी।
राजनीतिक सामग्री की नीति पर उठा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य विवाद प्रदर्शनी की सामग्री और बीकानेर हाउस की नीति के बीच आपत्ति को लेकर है। रायहान के मुताबिक, युवा आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरों को हटाने का निर्देश दिया गया, जबकि उन्होंने पहले ही कुछ राजनीतिक तस्वीरें हटाने और जरूरत पड़ने पर दूसरी तस्वीरों से बदलने की पेशकश की थी।
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हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बीकानेर हाउस प्रबंधन का विस्तृत पक्ष, संबंधित नीति की पूरी प्रति या तस्वीरों पर आपत्ति के अलग-अलग लिखित कारण शामिल नहीं हैं। इसलिए इस मामले में प्रबंधन की कार्रवाई के पीछे के सभी कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
रेहान वाड्रा के बयान के बाद अब विवाद का केंद्र प्रदर्शनी की अनुमति, राजनीतिक सामग्री से जुड़ी नीति और तस्वीरें हटाने की प्रक्रिया बन गया है। मामले में बीकानेर हाउस प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आने पर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।