बिलासपुर में Malabar Gold के शोरूम पर FIR, 22 कैरेट सोने की जांच में रीडिंग बदलने का आरोप

Malabar Gold FIR मामले में बिलासपुर शोरूम पर 22 कैरेट कंगन की जांच में रीडिंग बदलने का आरोप है। पुलिस ने मशीन और DVR जब्त किए।

Malabar Gold

बिलासपुर: Malabar Gold के एक शोरूम में सोने के पुराने कंगन की शुद्धता जांचने को लेकर विवाद सामने आया है। दिए गए विवरण के अनुसार, एक ग्राहक अपना 22 कैरेट HUID हॉलमार्क वाला कंगन बदलवाने पहुंचा था। शोरूम में XRF मशीन से जांच के दौरान कंगन की शुद्धता 20 कैरेट बताई गई। आरोप है कि दोबारा जांच करने पर भी यही रीडिंग आई, लेकिन एक जौहरी के हस्तक्षेप के बाद मशीन की सेटिंग में बदलाव किया गया और रीडिंग 916 दिखाई देने लगी, जो 22 कैरेट सोने की शुद्धता से जुड़ा निशान है।

इस मामले में शोरूम के मैनेजर और मशीन ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि पुलिस ने जांच के लिए मशीन और DVR को भी जब्त किया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में FIR की तारीख, संबंधित पुलिस थाने और कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पुराने सोने की जांच से कैसे शुरू हुआ विवाद?

जानकारी के मुताबिक, ग्राहक बिलासपुर स्थित Malabar Gold के शोरूम में अपना पुराना कंगन लेकर पहुंचा था। कंगन पर 22 कैरेट का HUID हॉलमार्क होने की बात कही गई है। ग्राहक इसे बदलवाना चाहता था, जिसके लिए शोरूम में सोने की शुद्धता की जांच की गई।

जांच के लिए XRF मशीन का इस्तेमाल किया गया। यह उपकरण धातु की संरचना का विश्लेषण करके उसमें मौजूद तत्वों की जानकारी देने में मदद करता है। रिपोर्ट के अनुसार, पहली जांच में कंगन की शुद्धता 20 कैरेट बताई गई। इसके बाद दोबारा और तीसरी बार जांच किए जाने पर भी कथित तौर पर यही परिणाम सामने आया।

शोरूम के कर्मचारियों ने हॉलमार्क की वैधता पर भी सवाल उठाए। इससे ग्राहक और कंगन बेचने वाले स्थानीय जौहरी को संदेह हुआ।

जौहरी के पहुंचने पर बदली मशीन की रीडिंग

विवाद बढ़ने पर ग्राहक ने उस स्थानीय जौहरी से संपर्क किया, जिसने उसे कंगन बेचा था। जौहरी शोरूम पहुंचा और उसने कंगन पर मौजूद HUID की पुष्टि करते हुए दोबारा जांच करने को कहा।

दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, इसी दौरान मशीन की सेटिंग में बदलाव किया गया। इसके बाद जांच में 916 की रीडिंग दिखाई देने लगी। सोने के आभूषणों पर 916 का निशान सामान्यतः 22 कैरेट सोने की शुद्धता से संबंधित होता है।

इस बदलाव ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। सवाल यह उठा कि एक ही कंगन की जांच में अलग-अलग परिणाम क्यों सामने आए और मशीन की सेटिंग बदलने के बाद रीडिंग में अंतर कैसे आया।

हालांकि, केवल रीडिंग में बदलाव से यह अपने आप साबित नहीं होता कि जानबूझकर गलत जांच की गई थी। इसके लिए मशीन की तकनीकी स्थिति, उसकी कैलिब्रेशन, जांच की प्रक्रिया और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।

सराफा एसोसिएशन पहुंची, पुलिस ने दर्ज की FIR

मामले की जानकारी मिलने के बाद सराफा एसोसिएशन के सदस्यों के भी शोरूम पहुंचने का दावा किया गया है। इसके बाद पुलिस ने शोरूम मैनेजर और मशीन ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की।

बताई गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने संबंधित XRF मशीन और DVR को अपने कब्जे में लिया। इनसे जांच के दौरान हुई गतिविधियों और मशीन के इस्तेमाल से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल की जा सकती है।

यह कार्रवाई मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फिर भी FIR दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। मामले की जिम्मेदारी और परिस्थितियों का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

क्या होता है 22 कैरेट सोना और 916 हॉलमार्क?

सोने की शुद्धता को कैरेट में मापा जाता है। 24 कैरेट सोना लगभग शुद्ध सोना माना जाता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुओं की भी कुछ मात्रा होती है। इसी कारण आभूषण बनाने में 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है।

916 का अंक सोने में लगभग 91.6 प्रतिशत शुद्धता को दर्शाता है। HUID यानी Hallmark Unique Identification एक विशिष्ट पहचान संख्या है, जिसका इस्तेमाल हॉलमार्क वाले आभूषण की पहचान और उससे संबंधित जानकारी की पुष्टि के लिए किया जाता है।

इस मामले में कंगन पर HUID हॉलमार्क होने और मशीन की रीडिंग बदलने के दावे जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इनकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और तकनीकी परीक्षण से ही हो सकेगी।

ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

सोने के आभूषण खरीदते या बदलवाते समय ग्राहक हॉलमार्क, बिल और शुद्धता से जुड़ी जानकारी पर भरोसा करते हैं। इसलिए जांच के दौरान किसी आभूषण की शुद्धता को लेकर विवाद सामने आने पर पारदर्शी प्रक्रिया और सही तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

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बिलासपुर के इस मामले में अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि अलग-अलग रीडिंग आने के पीछे तकनीकी कारण था या किसी तरह की गड़बड़ी। उपलब्ध जानकारी में Malabar Gold की आधिकारिक सफाई या जांच का अंतिम निष्कर्ष शामिल नहीं है। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।

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