94th Air Force Day: भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी लगातार चुनौती बनी हुई है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि मौजूदा स्थिति वायुसेना को प्रभावित कर रही है और आने वाले समय में हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। उन्होंने यह बात 94th Air Force Day से पहले आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।
एयर चीफ ने कहा कि वायुसेना के पास इस समय 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि तय जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। मौजूदा कुछ स्क्वाड्रन आने वाले वर्षों में रिटायर भी होने वाली हैं। ऐसे में नए लड़ाकू विमानों की समय पर डिलीवरी वायुसेना के लिए अहम है।
हर साल 36-40 नए लड़ाकू विमान चाहिए
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वायुसेना को आगे बढ़ने के लिए हर साल करीब 36 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। उन्होंने विमानों की डिलीवरी में देरी को लेकर कहा कि इससे वायुसेना प्रभावित हो रही है और उसकी कुल संख्या लगातार कम हो रही है।
वायुसेना को उम्मीद है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL से हर साल 24 तेजस Mk1A विमान मिलेंगे। इसके अलावा प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों के ऑर्डर से भी हर साल 12 विमान मिलने की उम्मीद है।
एयर चीफ के मुताबिक अगर ये दोनों योजनाएं तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो वायुसेना अपनी क्षमता बढ़ाने की निर्धारित गति हासिल कर सकेगी।
114 राफेल विमानों के सौदे पर भी नजर
एयर चीफ ने बताया कि 114 लड़ाकू विमानों का सौदा इसी वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ सकता है। इस प्रस्ताव के तहत राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारत में 96 विमानों का निर्माण करेगी।
यह प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में विमानों की जरूरत और उनकी समय पर उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
AMCA में देरी हुई तो पांचवीं पीढ़ी के विमान पर फैसला
पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर भी एयर चीफ ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि रूस ने भारत को सुखोई-57 विमान की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
एयर चीफ ने कहा कि वायुसेना को इस श्रेणी के विमान की जरूरत है। अगर भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम में देरी होती है, तो पांचवीं पीढ़ी के किसी विमान को हासिल करने पर फैसला लेना पड़ सकता है।
उन्होंने चीन के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने और पाकिस्तान की वायु क्षमता का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने इसे तत्काल बड़ी चिंता का कारण नहीं बताया। उनके मुताबिक केवल आधुनिक लड़ाकू विमानों का होना ही पर्याप्त नहीं है और ऑपरेशन सिंदूर का परिणाम भी इस बात को दर्शाता है।
तेजस Mk1A की डिलीवरी में दो बड़ी अड़चनें
HAL को करीब 180 तेजस Mk1A विमानों के उत्पादन का अनुबंध मिला हुआ है। लेकिन इनकी डिलीवरी में फिलहाल दो प्रमुख समस्याएं सामने आई हैं।
पहली समस्या रडार और मिसाइलों के एकीकरण से जुड़ी है, जिसे आने वाले कुछ हफ्तों में हल होने की उम्मीद है। दूसरी बड़ी समस्या अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से F404 इंजन की आपूर्ति में देरी है।
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HAL के पास करीब 30 तेजस विमान तैयार हैं, लेकिन उनके लिए केवल 11 इंजन उपलब्ध हैं। इस साल 16 और इंजन मिलने की उम्मीद है। इसके बाद हर साल 20 इंजन की आपूर्ति का वादा किया गया है।
वायुसेना के सामने अब चुनौती यह है कि नए विमानों की डिलीवरी, तेजस Mk1A का उत्पादन और भविष्य के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम समय पर आगे बढ़ें, ताकि लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या को संभाला जा सके।