राष्ट्रपति मुर्मू ने मांगे ‘वोट चोरी’ के सबूत, राहुल गांधी बोले- देंगे प्रमाण

Rahul Gandhi वोट चोरी मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबूत मांगे हैं। राहुल गांधी ने प्रमाण देने की बात कही, जबकि विपक्ष ने SIR और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।

वोट चोरी

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जो सबूत मांगे हैं, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। शुक्रवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात की और चुनाव आयोग के कामकाज सहित कई मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखीं। विपक्षी नेताओं ने इस दौरान कथित ‘वोट चोरी’, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े सवाल उठाए।

विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। इस बीच, विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।

राष्ट्रपति मुर्मू से मिले INDIA ब्लॉक के नेता

शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव एमए बेबी शामिल थे।

राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले INDIA ब्लॉक के सांसद संसद के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों को राष्ट्रपति के सामने रखा।

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष अपनी बात रख रहा है और इन आरोपों के समर्थन में सबूत भी उपलब्ध कराएगा। विपक्ष की इस पहल का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राष्ट्रपति के सामने उठाना है।

SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर विरोध

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। विपक्ष ने इन नामों को हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है।

विपक्षी नेताओं की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करना शामिल है।

हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष इससे अलग है। आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट से समर्थन मिला है। आयोग ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों में बड़ी संख्या मृत, दोहरे नाम वाले और मतदान के लिए अयोग्य मतदाताओं की है।

इस तरह मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद बना हुआ है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की कार्रवाई बता रहा है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार और चुनाव आयुक्त पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्ष लंबे समय से सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।

खड़गे ने कहा कि आजादी के बाद संविधान के माध्यम से नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला था। उनके मुताबिक, अब इस अधिकार पर खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।

खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों के पीछे केंद्र सरकार की भूमिका है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि देश में तानाशाही जैसी स्थिति बनती है, तो लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार केवल चुनाव में हिस्सा लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

विपक्ष की मांगों पर टकराव जारी

INDIA ब्लॉक के नेता पिछले तीन दिनों से इन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाए और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विवाद का समाधान किया जाए।

विपक्ष ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदान के अधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है और हटाए गए नामों के संबंध में मृत, दोहरे और अयोग्य मतदाताओं का हवाला दिया है।

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अब इस मामले में राहुल गांधी द्वारा सबूत उपलब्ध कराने के बयान और विपक्ष की मांगों पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

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