इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के आयुष मलिक की हिरासत को अवैध मानते हुए उसे मुक्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट के सामने आयुष ने कहा कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया और अपनी मर्जी से चांदनी से निकाह किया था।
हाईकोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा के मुताबिक कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की अनुमति दी है। कोर्ट के निर्देश पर शामली पुलिस प्रशासन ने आयुष को अदालत के सामने पेश किया, जहां उसने पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष रखा।
हाईकोर्ट में आयुष ने क्या कहा?
अदालत में आयुष मलिक ने स्पष्ट किया कि उसका धर्म परिवर्तन उसकी अपनी इच्छा से हुआ था। उसने यह भी कहा कि चांदनी से निकाह भी उसने अपनी मर्जी से किया है।
आयुष के बयान के बाद हाईकोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध माना और उसे मुक्त करने का आदेश दिया। साथ ही उसे अपनी इच्छा के अनुसार रहने और धर्म चुनने की स्वतंत्रता दी गई।
परिवार की शिकायत के बाद दर्ज हुई थी FIR
मामले के अनुसार, आयुष की फैमिली की ओर से चांदनी और उसके परिवार के खिलाफ धर्मांतरण को लेकर FIR दर्ज कराई गई थी। स्रोत के मुताबिक, यह कार्रवाई हिंदू संगठनों के दबाव के बीच हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आयुष को पेश करने का दिया था आदेश
इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया कि आयुष को उसकी फैमिली ने कथित तौर पर अवैध तरीके से हिरासत में रखा हुआ है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शामली जिले के पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया था कि आयुष को अदालत के सामने पेश किया जाए। निर्देश के मुताबिक आयुष को आज हाईकोर्ट में पेश किया गया। वहां उसने अपनी इच्छा और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में अपना पक्ष रखा।
कोर्ट के आदेश के बाद क्या हुआ?
आयुष के बयान के बाद हाईकोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध करार देते हुए उसे मुक्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयुष अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रह सकता है और अपनी पसंद का धर्म चुन सकता है। इस आदेश के साथ आयुष की हिरासत से जुड़ी याचिका पर अदालत ने अपना निर्देश जारी कर दिया।