Supreme Court का बड़ा फैसला: CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR रद्द, 5 सितंबर का मार्च टला

नई दिल्ली: Supreme Court ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। Chief Justice of India Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR बंद करने का आदेश दिया है।

Supreme Court ने CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR बंद करने का आदेश दिया

अदालत के फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का ऐलान किया। संगठन की ओर से कहा गया कि अब वह सरकार और Supreme Court के आदेश के अनुपालन की प्रतीक्षा करेगा।

Supreme Court ने सभी FIR बंद करने का आदेश दिया

तीन सदस्यीय पीठ में CJI Surya Kant के साथ Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana शामिल थे। अदालत ने संविधान के Article 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देशभर में दर्ज मामलों को समाप्त करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए न्याय के हित में यह कदम उठाया जा रहा है। यह आदेश केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। अदालत ने 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को बंद करने का निर्देश दिया।

5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस

CJP के सह-समन्वयक और प्रमुख प्रवक्ता Saurav Das ने Supreme Court में संगठन की ओर से 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा की। यह मार्च India Gate से Police Headquarters तक निकाला जाना प्रस्तावित था। CJP ने जुलाई में अपना 36 दिन लंबा आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार पर अपने आश्वासनों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था। इसके बाद संगठन ने दोबारा मार्च का ऐलान किया था। अदालत में सरकार की ओर से दिए गए सकारात्मक रुख और FIR को लेकर आए आदेश के बाद CJP ने मार्च रद्द करने का फैसला लिया।

सरकार ने आश्वासनों को पूरा करने की बात कही

सुनवाई के दौरान Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि केंद्र सरकार जुलाई में CJP नेताओं के साथ हुई बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि Centre के अलावा Maharashtra, Bihar, West Bengal और Assam की सरकारें भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, गंभीर अपराधों से जुड़े ऐसे मामले जिनमें किसी व्यक्ति को पहले से आरोपी बनाया गया है, उन्हें इससे अलग रखा गया। Solicitor General ने Supreme Court से Article 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया था।

NEET पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा

सुनवाई के दौरान Supreme Court ने NEET पेपर लीक से जुड़े विवाद के बीच आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। अदालत ने Centre को तीन महीने के भीतर मुआवजे की व्यवस्था करने को कहा है। सरकार की ओर से भी इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया और तौर-तरीके तय करने की बात कही गई।

Kerala, Madhya Pradesh और Uttar Pradesh के मामलों का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता Vrinda Grover समेत कुछ वकीलों ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि Kerala, Madhya Pradesh और Uttar Pradesh में भी मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद Supreme Court ने स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच देश के किसी भी हिस्से में दर्ज संबंधित FIR को बंद माना जाएगा।

CJP ने जुलाई में खत्म किया था 36 दिन का आंदोलन

CJP ने NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ 36 दिनों तक आंदोलन किया था। आंदोलन खत्म करते समय प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना भी शामिल था। बाद में संगठन ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। इसी के बाद 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च की घोषणा की गई थी।

Article 142 के तहत Supreme Court ने लिया फैसला

Article 142 Supreme Court को लंबित मामलों में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की शक्ति देता है। इसी संवैधानिक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े इन मामलों को बंद करने का आदेश दिया।

सरकार की ओर से सोमवार को ही FIR खत्म करने के लिए Supreme Court में आवेदन देने की बात कही गई थी। मंगलवार को तीन सदस्यीय पीठ ने मामले पर सुनवाई की और आदेश जारी किया।

अब आगे क्या होगा?

Supreme Court के आदेश के बाद 5 सितंबर का CJP मार्च वापस ले लिया गया है। अब सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार संबंधित FIR को बंद करने और NEET पेपर लीक विवाद से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए तीन महीने के भीतर मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।

CJP की ओर से भी कहा गया है कि संगठन अब अदालत के आदेश और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के पालन की प्रतीक्षा करेगा।

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