वाल्मीकि निगम कथित घोटाला: बी. नागेंद्र ने कर्नाटक कैबिनेट से दिया इस्तीफा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए भावुक

कर्नाटक के कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने 89 करोड़ रुपये के कथित वाल्मीकि निगम घोटाले के आरोपों के बीच कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। जानें पूरा मामला और उनका राजनीतिक सफर।

बी नागेंद्र इस्तीफा

कर्नाटक के कांग्रेस नेता और मंत्री बी. नागेंद्र ने 89 करोड़ रुपये के कथित वाल्मीकि निगम वित्तीय अनियमितता मामले के बीच कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। शुक्रवार शाम इस्तीफे की घोषणा करते समय नागेंद्र भावुक हो गए और प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उनकी आंखों से आंसू निकल आए। यह पिछले दो वर्षों में दूसरी बार है जब बी. नागेंद्र ने मंत्री पद छोड़ा है। इससे पहले भी जून 2024 में इसी विवाद के दौरान उन्होंने सिद्धरमैया सरकार से इस्तीफा दिया था। हाल ही में कैबिनेट विस्तार के बाद उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

बी. नागेंद्र ने क्यों दिया इस्तीफा?

बी. नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े करीब 89 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोप लगे हैं। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही थी।

इस्तीफे का ऐलान करते हुए नागेंद्र ने कहा कि वह संविधान में विश्वास रखते हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विधानसभा में चर्चा की मांग भी की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में सबूत कहां हैं। नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने फैसले से पद छोड़ने का निर्णय लिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हुए बी. नागेंद्र

इस्तीफे की घोषणा के दौरान बी. नागेंद्र काफी भावुक नजर आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन पर राजनीतिक रूप से हमला किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर आदिवासी और दलित विरोधी सोच रखने का आरोप लगाया। नागेंद्र ने यह भी कहा कि उन्हें दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा था, तो उन्होंने इससे इनकार किया। नागेंद्र के मुताबिक, मंत्री पद छोड़ने का फैसला उनका अपना था।

वाल्मीकि निगम का 89 करोड़ रुपये का मामला क्या है?

यह विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड से जुड़ा है। आरोप है कि निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। मामला मई 2024 में उस समय चर्चा में आया था, जब निगम के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखरन पी. की मौत के बाद एक नोट सामने आया। इसमें कथित तौर पर बिना अनुमति धनराशि ट्रांसफर किए जाने का जिक्र किया गया था। इसके बाद हुई जांच में निगम के खातों से अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम भेजे जाने की बात सामने आई। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार और बी. नागेंद्र को लगातार घेरा।

दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा

बी. नागेंद्र इससे पहले सिद्धरमैया सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वाल्मीकि निगम विवाद के बीच उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद छोड़ दिया था। बाद में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और नई कैबिनेट के गठन के बाद उन्हें एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। 3 अगस्त को हुई कैबिनेट व्यवस्था में उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, कैबिनेट में वापसी के कुछ ही समय बाद उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा दे दिया।

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बी. नागेंद्र का राजनीतिक सफर

बी. नागेंद्र का राजनीतिक करियर कई चरणों से गुजरा है। उन्होंने 2008 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2013 में उन्होंने कुदलिगी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।

वर्ष 2018 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने बेल्लारी की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से लगातार दो बार चुनाव जीता। नागेंद्र कर्नाटक की राजनीति में अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और इससे पहले आदिवासी कल्याण विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव

बी. नागेंद्र का इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब कर्नाटक भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ 1 सितंबर से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने की घोषणा की है।

भाजपा इस अभियान के जरिए राज्य सरकार के कामकाज, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और भर्ती में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। वाल्मीकि निगम से जुड़ा मामला और बी. नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी भी भाजपा के राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख मुद्दा बन सकती थी। राज्य भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के अनुसार, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी प्रस्तावित पदयात्रा का उद्घाटन करेंगे।

आगे क्या होगा?

बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले को लेकर कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

नागेंद्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों से जुड़े सबूतों पर सवाल उठाते हुए खुद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, भाजपा पहले से ही इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला करती रही है। आने वाले दिनों में जांच और इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं कर्नाटक की राजनीति में अहम बनी रह सकती हैं।

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