Gold Silver Price में बड़ी गिरावट आई है। चांदी अगस्त के शिखर से ₹56,000 और सोना ₹23,000 नीचे है। जानें तेल, महंगाई और अमेरिकी ब्याज दरों का असर।
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में अक्टूबर के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली है। अगस्त में बने उच्च स्तर से चांदी करीब ₹56,000 प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है, जबकि सोने के भाव में भी प्रति 10 ग्राम लगभग ₹23,000 की कमी आई है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को चांदी की कीमतों पर दबाव जारी रहा और भाव में एक दिन में करीब ₹6,800 प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट के पीछे अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका, बॉन्ड यील्ड में तेजी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव जैसे कारण बताए जा रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं पर पड़ रहा है।
Gold Silver Price: शुक्रवार को कितने रहे भाव?
शुक्रवार के कारोबार में चांदी की कीमत गिरकर करीब ₹1,92,800 प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह दिसंबर 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर बताया गया है। एक दिन पहले के मुकाबले कीमत में लगभग ₹6,800 की कमी दर्ज की गई।
वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव भी कमजोर रहा। कारोबार के दौरान इसमें करीब 0.29 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत लगभग ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी रही।
दिए गए बाजार आंकड़ों में सोने का भाव ₹1,41,561 प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव ₹1,93,109 प्रति किलोग्राम भी दर्ज किया गया है। अलग-अलग समय पर दर्ज कीमतों में अंतर हो सकता है।
अगस्त के उच्च स्तर से कितनी सस्ती हुई चांदी?
चांदी की कीमतों में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त में इसका भाव ₹2,48,800 प्रति किलोग्राम तक पहुंचा था। शुक्रवार के निचले स्तर को आधार मानें तो यह करीब ₹56,000 नीचे आ चुकी है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस सप्ताह भी कमजोरी बनी रही और लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट की स्थिति बन गई। अक्टूबर में लगातार बिकवाली के कारण इस धातु पर दबाव बढ़ा है।
चांदी ने वर्ष 2025 में लगभग 170 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी। वहीं, अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम से यह आधे से ज्यादा नीचे आ चुकी है।
सोने की कीमतों में भी इसी तरह की कमजोरी दिखाई दी है। अगस्त में लगभग ₹1,64,773 प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर से सोना करीब ₹23,000 नीचे आ गया है।
सोने-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
1. अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका
सोने और चांदी से निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है, तो कीमती धातुओं की मांग प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने के बाद ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की आशंका बढ़ी है। पिछले सप्ताह जारी उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़ों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर दिखाई दिया।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। मध्य पूर्व में हाउती हमलों और ईरान पर अमेरिका की संभावित नई कार्रवाई से जुड़ी खबरों ने तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
महंगा कच्चा तेल महंगाई के दबाव को बढ़ा सकता है। इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रख सकते हैं या सख्त नीति अपना सकते हैं।
3. बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेश पर असर
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने की कीमतों के लिए चुनौती बन रही है। जब निवेशकों को बॉन्ड जैसे विकल्पों से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों को रखने की लागत बढ़ जाती है।
आमतौर पर सोने को महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों की आशंका इसकी मांग पर दबाव डाल सकती है।
अब सोने और चांदी की कीमतों पर किसकी नजर?
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष और रिसर्च विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर के स्तर की ओर फिसला। उन्होंने कहा कि ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों की संभावनाएं बुलियन बाजार पर दबाव बना रही हैं।
यह भी पढ़ें: दिल्ली कोर्ट से CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को राहत, 7 दिन बाद रिहाई
निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक पर है। बाजार में अक्टूबर की बैठक में दरें बढ़ने की संभावना सीमित मानी जा रही थी, जबकि दिसंबर में बढ़ोतरी की आशंका अधिक थी। 29 अक्टूबर को आने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) महंगाई आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल सोने और चांदी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए ब्याज दरों, कच्चे तेल और महंगाई से जुड़े संकेत अहम बने हुए हैं। कीमतों में आगे क्या रुख रहेगा, यह आने वाले आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगा।