दिल्ली कोर्ट से CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को राहत, 7 दिन बाद रिहाई

CJP leaders Saurav Das and Ashutosh Ranka को दिल्ली में सात दिन की हिरासत के बाद रिहा किया गया। SEM कोर्ट ने लिखित माफी और हलफनामा जमा करने पर आदेश दिया।

दिल्ली कोर्ट से CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को राहत, 7 दिन बाद रिहाई

नई दिल्ली: दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका को बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को रिहा कर दिया गया। दोनों नेता पिछले सात दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने लिखित माफी और हलफनामा जमा किए जाने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया।

इससे पहले दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई और दोनों नेता SEM के सामने पेश हुए, जहां रिहाई का आदेश जारी हुआ।

CJP नेताओं की रिहाई का आदेश कैसे आया?

CJP leaders Saurav Das and Ashutosh Ranka की रिहाई के लिए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में करीब डेढ़ घंटे तक कार्यवाही चली। अदालत ने दोनों नेताओं की ओर से लिखित माफी और हलफनामा जमा किए जाने के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, SEM के सामने यह उनकी तीसरी पेशी थी। इससे पहले दोनों की जमानत की दो कोशिशें सफल नहीं हुई थीं। बुधवार की सुनवाई के बाद उनकी हिरासत समाप्त करने का रास्ता साफ हुआ।

रिहाई के बाद सौरव दास ने कहा, “सच्चाई की जीत हुई है।” CJP की राष्ट्रीय सचिव आफरीन नवाज ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखा और लोकतंत्र में अपना भरोसा कायम रखा।

पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने भी रिहाई के फैसले पर खुशी जताई। उनका कहना था कि यह निर्णय पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन देर से आया फैसला भी स्वागत योग्य है।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी पहुंचा था मामला

रिहाई से पहले दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की। हाई कोर्ट ने सुनवाई तो की, लेकिन हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत नहीं दी गई। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई।

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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और उसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए। अदालत की टिप्पणी थी कि प्रदर्शन में आगे रहने वाले लोगों की गतिविधियों का असर दूसरे लोगों पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में भीड़ में शामिल सभी लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

अदालत ने दूसरे देशों में छात्र प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने और आगजनी जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया। ये टिप्पणियां शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड के कथित उल्लंघन के संदर्भ में की गईं।

14 अक्टूबर से हिरासत में थे दोनों नेता

मामले की शुरुआत अक्टूबर में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ घोषित प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं से हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सौरव दास और आशुतोष रंका को हवाई अड्डे पर रोका गया था।

इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई की गई। 11 अक्टूबर को दोनों को 50,000 रुपये के शांति बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा किया गया था।

आरोप है कि 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की और राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जबकि वहां लागू प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी था। पुलिस ने इसे पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन माना।

इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को दोबारा हिरासत में लिया गया। उसी दिन उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीणा के सामने पेश किया गया, जहां पांच दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया गया। 19 अक्टूबर को मामले की अगली कार्यवाही के दौरान हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी।

उस दिन के आदेश में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट रितु राज ने कहा था कि संबंधित लोगों ने कथित तौर पर बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया और इससे शांति भंग होने की स्थिति पैदा हुई।

अब आगे क्या?

CJP leaders Saurav Das and Ashutosh Ranka की रिहाई लिखित माफी और हलफनामा जमा करने के बाद हुई है। पार्टी ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि हाई कोर्ट की टिप्पणियां प्रदर्शन के दौरान नियमों और शांति बॉन्ड की शर्तों के पालन पर अदालत की चिंता को सामने लाती हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में रिहाई के बाद किसी नई कानूनी कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है। दोनों नेताओं की रिहाई से उनकी सात दिन की न्यायिक हिरासत समाप्त हो गई है।

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