बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की पार्टी में सक्रिय भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद की पार्टी में वापसी और उन्हें दोबारा जिम्मेदारी देने पर विचार तभी किया जा सकता है, जब उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने आकाश आनंद को BSP के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था। 3 सितंबर को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में यह फैसला लिया गया था।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर साधा निशाना
बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार रखते हुए मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी के भीतर अनुशासन से जुड़े मामलों का एक प्रमुख उदाहरण बताया।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ये तीनों ही राज्य, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’बहुजन समाज’ को ’शोषित से शासक वर्ग’ बनने हेतु उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के कारवाँ को आगे बढ़ाने के लिये…
— Mayawati (@Mayawati) September 9, 2026
मायावती के मुताबिक, पार्टी ने अशोक सिद्धार्थ को कई बार अपने तरीके में सुधार करने का मौका दिया, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के साथ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को BSP के मिशन से अधिक महत्व दिया। मायावती ने कहा कि इसका असर अशोक सिद्धार्थ के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ा।
आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटकर BSP और बहुजन आंदोलन के हित में राजनीति से पूरी तरह अलग हो जाना चाहिए।
उनके अनुसार, ऐसा होने पर ही आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम कर पाएंगे। इसके बाद पार्टी आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारियां देने के सवाल पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी संगठन में इस मुद्दे को लेकर यही सामान्य राय है।
3 सितंबर को आकाश आनंद से वापस ली गई थी जिम्मेदारी
लखनऊ में 3 सितंबर को हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को BSP के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था।
बैठक के दौरान मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है। इसी वजह से फिलहाल उन्हें पार्टी की कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
अशोक सिद्धार्थ को 2 अगस्त को पार्टी से निकाला गया था
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ BSP के पूर्व राज्यसभा सांसद रहे हैं। पार्टी ने 2 अगस्त को उन्हें निष्कासित कर दिया था। उन पर बार-बार अनुशासनहीनता, पार्टी विरोधी रुख और अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी तरीके से पूरा नहीं करने के आरोप लगाए गए थे।
अब मायावती ने स्पष्ट किया है कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह अलग होते हैं, तो इससे आकाश आनंद के लिए पार्टी में दोबारा सक्रिय भूमिका का रास्ता खुल सकता है।
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव पर BSP का फोकस
मायावती ने BSP कार्यकर्ताओं और समर्थकों से निजी या पारिवारिक हितों के कारण पार्टी के राजनीतिक अभियान को नुकसान न पहुंचाने की अपील भी की।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ये तीनों राज्य BSP तथा बहुजन आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। मायावती ने पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों से चुनावी तैयारी में पूरी मेहनत के साथ जुटने की अपील की।
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उन्होंने अलग-अलग समुदायों के लोगों से भी BSP को समर्थन देने की अपील की। मायावती ने कहा कि पार्टी आरक्षण जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों और जातिवादी तत्वों की चुनौतियों का सामना कर रही है।
निष्कर्ष: आकाश आनंद की BSP में सक्रिय वापसी का रास्ता फिलहाल मायावती की बताई शर्त से जुड़ा हुआ है। पार्टी में उनकी दोबारा जिम्मेदारी पर विचार तभी होगा, जब अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छोड़कर राजनीति से पूरी तरह संन्यास लें।