दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: के. कविता पर ‘द पायनियर’ अखबार को लेकर लगाए आरोपों पर रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने तेलंगाना की वरिष्ठ नेता के. कविता को एक बड़ा झटका देते हुए उन्हें ‘द पायनियर‘ अखबार के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयान आगे प्रकाशित करने, प्रसारित करने या सोशल मीडिया पर साझा करने से रोक दिया है। यह अंतरिम आदेश ₹11 करोड़ के एक मानहानि मुकदमे की सुनवाई के दौरान पारित किया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने के. कविता को द पायनियर अखबार पर आरोप लगाने से रोका

क्या है पूरा मामला

यह विवाद तब शुरू हुआ जब के. कविता ने 9 जुलाई को एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि उनके भाई और BRS नेता के. टी. रामाराव यानी KTR ने करीब ₹188 करोड़ की रकम देकर ‘द पायनियर’ अखबार खरीद लिया है। कविता ने यह भी आरोप लगाया था कि अखबार अब पार्टी की विचारधारा के अनुसार खबरें छाप रहा है।

इन्हीं आरोपों को लेकर अखबार की प्रकाशक कंपनी CMYK Printech Limited ने अदालत का रुख किया और कविता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत के तौर पर कविता को निर्देश दिया कि वे इन आरोपों को न तो आगे प्रकाशित करें, न प्रसारित करें और न ही किसी अन्य माध्यम से दोबारा शेयर करें। कोर्ट का यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक मामले में आगे कोई फैसला नहीं आ जाता।

गौर करने वाली बात यह है कि यह रोक सिर्फ कविता तक सीमित नहीं है। अदालत ने 14 अन्य पक्षों को भी इसी तरह के निर्देश दिए हैं। इनमें कुछ यूट्यूब चैनल, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म, पत्रकार और प्रकाशक शामिल हैं, जिन्होंने इन आरोपों से जुड़ी सामग्री प्रसारित की थी।

अखबार का पक्ष

‘द पायनियर’ के प्रकाशकों ने कविता के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। कंपनी का कहना है कि इस तरह के आरोपों से अखबार की साख को नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते उन्होंने अदालत में मानहानि का दावा ठोका।

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आगे क्या होगा

कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पक्षों को समन जारी करते हुए उन्हें अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब आगे की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

फिलहाल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश लागू रहेगा, और मामले पर अंतिम निर्णय आने तक इससे जुड़े सभी पक्षों को अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा।

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